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@holy-verses/quran

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[{"i":48,"v":["निश्चय ही हमने तुम्हारे लिए एक खुली विजय प्रकट की","ताकि अल्लाह तुम्हारे अगले और पिछले गुनाहों को क्षमा कर दे और तुमपर अपनी अनुकम्पा पूर्ण कर दे और तुम्हें सीधे मार्ग पर चलाए","और अल्लाह तुम्हें प्रभावकारी सहायता प्रदान करे","वहीं है जिसने ईमानवालों के दिलों में सकीना (प्रशान्ति) उतारी, ताकि अपने ईमान के साथ वे और ईमान की अभिवृद्धि करें - आकाशों और धरती की सभी सेनाएँ अल्लाह ही की है, और अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है।","ताकि वह मोमिन पुरुषों औप मोमिन स्त्रियों को ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरें बहती होंगी कि वे उनमें सदैव रहें और उनसे उनकी बुराईयाँ दूर कर दे - यह अल्लाह के यहाँ बड़ी सफलता है।","और कपटाचारी पुरुषों और कपटाचारी स्त्रियों और बहुदेववादी पुरुषों और बहुदेववादी स्त्रियों को, जो अल्लाह के बारे में बुरा गुमान रखते है, यातना दे। उन्हीं पर बुराई की गर्दिश है। उनपर अल्लाह का क्रोध हुआ और उसने उनपर लानत की, और उसने उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखा है, और वह अत्यन्त बुरा ठिकाना है","आकाशों और धरती की सब सेनाएँ अल्लाह ही की है। अल्लाह प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है","निश्चय ही हमने तुम्हें गवाही देनेवाला और शुभ सूचना देनेवाला और सचेतकर्त्ता बनाकर भेजा","ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ, उसे सहायता पहुँचाओ और उसका आदर करो, और प्रातःकाल और संध्या समय उसकी तसबीह करते रहो","(ऐ नबी) वे लोग जो तुमसे बैअत करते है वे तो वास्तव में अल्लाह ही से बैअत करते है। उनके हाथों के ऊपर अल्लाह का हाथ होता है। फिर जिस किसी ने वचन भंग किया तो वह वचन भंग करके उसका बवाल अपने ही सिर लेता है, किन्तु जिसने उस प्रतिज्ञा को पूरा किया जो उसने अल्लाह से की है तो उसे वह बड़ा बदला प्रदान करेगा","जो बद्‌दू पीछे रह गए थे, वे अब तुमसे कहेगे, \"हमारे माल और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त कर रखा था; तो आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना कीजिए।\" वे अपनी ज़बानों से वे बातें कहते है जो उनके दिलों में नहीं। कहना कि, \"कौन है जो अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे किए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचानी चाहे या वह तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है।","नहीं, बल्कि तुमने यह समझा कि रसूल और ईमानवाले अपने घरवालों की ओर लौटकर कभी न आएँगे और यह तुम्हारे दिलों को अच्छा लगा। तुमने तो बहुत बुरे गुमान किए और तुम्हीं लोग हुए तबाही में पड़नेवाले।","और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाया, तो हमने भी इनकार करनेवालों के लिए भड़कती आग तैयार कर रखी है","अल्लाह ही की है आकाशों और धरती की बादशाही। वह जिसे चाहे क्षमा करे और जिसे चाहे यातना दे। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","जब तुम ग़नीमतों को प्राप्त करने के लिए उनकी ओर चलोगे तो पीछे रहनेवाले कहेंगे, \"हमें भी अनुमति दी जाए कि हम तुम्हारे साथ चले।\" वे चाहते है कि अल्लाह का कथन को बदल दे। कह देना, \"तुम हमारे साथ कदापि नहीं चल सकते। अल्लाह ने पहले ही ऐसा कह दिया है।\" इसपर वे कहेंगे, \"नहीं, बल्कि तुम हमसे ईर्ष्या कर रहे हो।\" नहीं, बल्कि वे लोग समझते थोड़े ही है","पीछे रह जानेवाले बद्‌दूओं से कहना, \"शीघ्र ही तुम्हें ऐसे लोगों की ओर बुलाया जाएगा जो बड़े युद्धवीर है कि तुम उनसे लड़ो या वे आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञापालन करोगे तो अल्लाह तुम्हें अच्छा बदला प्रदान करेगा। किन्तु यदि तुम फिर गए, जैसे पहले फिर गए थे, तो वह तुम्हें दुखद यातना देगा।","न अन्धे के लिए कोई हरज है, न लँगडे के लिए कोई हरज है और न बीमार के लिए कोई हरज है। जो भी अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, उसे वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करके, जिनके नीचे नहरे बह रही होगी, किन्तु जो मुँह फेरेगा उसे वह दुखद यातना देगा","निश्चय ही अल्लाह मोमिनों से प्रसन्न हुआ, जब वे वृक्ष के नीचे तुमसे बैअत कर रहे थे। उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर उसने सकीना (प्रशान्ति) उतारी और बदले में उन्हें मिलनेवाली विजय निश्चित कर दी","और बहुत-सी ग़नीमतें भी, जिन्हें वे प्राप्त करेंगे। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है","अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी गंनीमतों का वादा किया हैं, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। यह विजय तो उसने तुम्हें तात्कालिक रूप से निश्चित कर दी। और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए (कि वे तुमपर आक्रमण करने का साहस न कर सकें) और ताकि ईमानवालों के लिए एक निशानी हो। और वह सीधे मार्ग की ओर तुम्हारा मार्गदर्शन करे","इसके अतिरिक्त दूसरी और विजय का भी वादा है, जिसकी सामर्थ्य अभी तुम्हे प्राप्त नहीं, उन्हें अल्लाह ने घेर रखा है। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है","यदि (मक्का के) इनकार करनेवाले तुमसे लड़ते तो अवश्य ही पीठ फेर जाते। फिर यह भी कि वे न तो कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक","यह अल्लाह की उस रीति के अनुकूल है जो पहले से चली आई है, और तुम अल्लाह की रीति में कदापि कोई परिवर्तन न पाओगे","वही है जिसने उसके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे मक्के की घाटी में रोक दिए इसके पश्चात कि वह तुम्हें उनपर प्रभावी कर चुका था। अल्लाह उसे देख रहा था जो कुछ तुम कर रहे थे","ये वही लोग तो है जिन्होंने इनकार किया और तुम्हें मस्जिदे हराम (काबा) से रोक दिया और क़ुरबानी के बँधे हुए जानवरों को भी इससे रोके रखा कि वे अपने ठिकाने पर पहुँचे। यदि यह ख़याल न होता कि बहुत-से मोमिन पुरुष और मोमिन स्त्रियाँ (मक्का में) मौजूद है, जिन्हें तुम नहीं जानते, उन्हें कुचल दोगे, फिर उनके सिलसिले में अनजाने तुमपर इल्ज़ाम आएगा (तो युद्ध की अनुमति दे दी जाती, अनुमति इसलिए नहीं दी गई) ताकि अल्लाह जिसे चाहे अपनी दयालुता में दाख़िल कर ले। यदि वे ईमानवाले अलग हो गए होते तो उनमें से जिन लोगों ने इनकार किया उनको हम अवश्य दुखद यातना देते","याद करो जब इनकार करनेवाले लोगों ने अपने दिलों में हठ को जगह दी, अज्ञानपूर्ण हठ को; तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालो पर सकीना (प्रशान्ति) उतारी और उन्हें परहेज़गारी (धर्मपरायणता) की बात का पाबन्द रखा। वे इसके ज़्यादा हक़दार और इसके योग्य भी थे। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है","निश्चय ही अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा स्वप्न दिखाया, \"यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे हराम (काबा) में प्रवेश करोगे बेखटके, अपने सिर के बाल मुड़ाते और कतरवाते हुए, तुम्हें कोई भय न होगा।\" हुआ यह कि उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। अतः इससे पहले उसने शीघ्र प्राप्त होनेवाली विजय तुम्हारे लिए निश्चिंत कर दी","वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्यधर्म के साथ भेजा, ताकि उसे पूरे के पूरे धर्म पर प्रभुत्व प्रदान करे और गवाह की हैसियत से अल्लाह काफ़ी है","अल्लाह के रसूल मुहम्मद और जो लोग उनके साथ हैं, वे इनकार करनेवालों पर भारी हैं, आपस में दयालु है। तुम उन्हें रुकू में, सजदे में, अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता चाहते हुए देखोगे। वे अपने चहरों से पहचाने जाते हैं जिनपर सजदों का प्रभाव है। यही उनकी विशेषता तौरात में और उनकी विशेषता इंजील में उस खेती की तरह उल्लिखित है जिसने अपना अंकुर निकाला; फिर उसे शक्ति पहुँचाई तो वह मोटा हुआ और वह अपने तने पर सीधा खड़ा हो गया। खेती करनेवालों को भा रहा है, ताकि उनसे इनकार करनेवालों का भी जी जलाए। उनमें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनसे अल्लाह ने क्षमा और बदले का वादा किया है"],"n":"अल-फ़थ"},{"i":49,"v":["ऐ ईमानवालो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढो और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सुनता, जानता है","ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! तुम अपनी आवाज़ों को नबी की आवाज़ से ऊँची न करो। और जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे से ज़ोर से बोलते हो, उससे ऊँची आवाज़ में बात न करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म अकारथ हो जाएँ और तुम्हें ख़बर भी न हो","वे लोग जो अल्लाह के रसूल के समक्ष अपनी आवाज़ों को दबी रखते है, वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँचकर चुन लिया है। उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है","जो लोग (ऐ नबी) तुम्हें कमरों के बाहर से पुकारते है उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते","यदि वे धैर्य से काम लेते यहाँ तक कि तुम स्वयं निकलकर उनके पास आ जाते तो यह उनके लिए अच्छा होता। किन्तु अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! यदि कोई अवज्ञाकारी तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो उसकी छानबीन कर लिया करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी गिरोह को अनजाने में तकलीफ़ और नुक़सान पहुँचा बैठो, फिर अपने किए पर पछताओ","जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह का रसूल मौजूद है। बहुत-से मामलों में यदि वह तुम्हारी बात मान ले तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। किन्तु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुन्दरता दे दी और इनकार, उल्लंघन और अवज्ञा को तुम्हारे लिए बहुत अप्रिय बना दिया।","ऐसे ही लोग अल्लाह के उदार अनुग्रह और अनुकम्पा से सूझबूझवाले है। और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है","यदि मोमिनों में से दो गिरोह आपस में लड़ पड़े तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि उनमें से एक गिरोह दूसरे पर ज़्यादती करे, तो जो गिरोह ज़्यादती कर रहा हो उससे लड़ो, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट आए तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, और इनसाफ़ करो। निश्चय ही अल्लाह इनसाफ़ करनेवालों को पसन्द करता है","मोमिन तो भाई-भाई ही है। अतः अपने दो भाईयो के बीच सुलह करा दो और अल्लाह का डर रखो, ताकि तुमपर दया की जाए","ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! न पुरुषों का कोई गिरोह दूसरे पुरुषों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छे हों और न स्त्रियाँ स्त्रियों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छी हों, और न अपनों पर ताने कसो और न आपस में एक-दूसरे को बुरी उपाधियों से पुकारो। ईमान के पश्चात अवज्ञाकारी का नाम जुडना बहुत ही बुरा है। और जो व्यक्ति बाज़ न आए, तो ऐसे ही व्यक्ति ज़ालिम है","ऐ ईमान लानेवालो! बहुत से गुमानों से बचो, क्योंकि कतिपय गुमान गुनाह होते है। और न टोह में पड़ो और न तुममें से कोई किसी की पीठ पीछे निन्दा करे - क्या तुममें से कोई इसको पसन्द करेगा कि वह मरे हुए भाई का मांस खाए? वह तो तुम्हें अप्रिय होगी ही। - और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह तौबा क़बूल करनेवाला, अत्यन्त दयावान है","ऐ लोगो! हमनें तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें बिरादरियों और क़बिलों का रूप दिया, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। वास्तव में अल्लाह के यहाँ तुममें सबसे अधिक प्रतिष्ठित वह है, जो तुममे सबसे अधिक डर रखता है। निश्चय ही अल्लाह सबकुछ जाननेवाला, ख़बर रखनेवाला है","बद्‌दुओं ने कहा कि, \"हम ईमान लाए।\" कह दो, \"तुम ईमान नहीं लाए। किन्तु यूँ कहो, 'हम तो आज्ञाकारी हुए' ईमान तो अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल ही नहीं हुआ। यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो तो वह तुम्हारे कर्मों में से तुम्हारे लिए कुछ कम न करेगा। निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।","मोमिन तो बस वही लोग है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, फिर उन्होंने कोई सन्देह नहीं किया और अपने मालों और अपनी जानों से अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया। वही लोग सच्चे है","कहो, \"क्या तुम अल्लाह को अपने धर्म की सूचना दे रहे हो। हालाँकि जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, अल्लाह सब जानता है? अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है।","वे तुमपर एहसान जताते है कि उन्होंने इस्लाम क़बूल कर लिया। कह दो, \"मुझ पर अपने इस्लाम का एहसान न रखो, बल्कि यदि तुम सच्चे हो तो अल्लाह ही तुमपर एहसान रखता है कि उसने तुम्हें ईमान की राह दिखाई।","निश्चय ही अल्लाह आकाशों और धरती के अदृष्ट को जानता है। और अल्लाह देख रहा है जो कुछ तुम करते हो।"],"n":"अल-हुजुरात"},{"i":50,"v":["क़ाफ़॰; गवाह है क़ुरआन मजीद","बल्कि उन्हें तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक सावधान करनेवाला आ गया। फिर इनकार करनेवाले कहने लगे, \"यह तो आश्चर्य की बात है","क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी हो जाएँगे (तो फिर हम जीवि होकर पलटेंगे)? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है","हम जानते है कि धरती उनमें जो कुछ कमी करती है और हमारे पास सुरक्षित रखनेवाली एक किताब भी है","बल्कि उन्होंने सत्य को झुठला दिया जब वह उनके पास आया। अतः वे एक उलझन भी बात में पड़े हुए है","अच्छा तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आकाश को नहीं देखा, हमने उसे कैसा बनाया और उसे सजाया। और उसमें कोई दरार नहीं","और धरती को हमने फैलाया और उसमे अटल पहाड़ डाल दिए। और हमने उसमें हर प्रकार की सुन्दर चीज़े उगाई","आँखें खोलने और याद दिलाने के उद्देश्य से, हर बन्दे के लिए जो रुजू करनेवाला हो","और हमने आकाश से बरकतवाला पानी उतारा, फिर उससे बाग़ और फ़सल के अनाज।","और ऊँचे-ऊँचे खजूर के वृक्ष उगाए जिनके गुच्छे तह पर तह होते है","बन्दों की रोजी के लिए। और हमने उस (पानी) के द्वारा निर्जीव धरती को जीवन प्रदान किया। इसी प्रकार निकलना भी हैं","उनसे पहले नूह की क़ौम, 'अर्-रस' वाले, समूद","आद, फ़िरऔन , लूत के भाई","अल-ऐका' वाले और तुब्बा के लोग भी झुठला चुके है। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया। अन्ततः मेरी धमकी सत्यापित होकर रही","क्या हम पहली बार पैदा करने से असमर्थ रहे? नहीं, बल्कि वे एक नई सृष्टि के विषय में सन्देह में पड़े है","हमने मनुष्य को पैदा किया है और हम जानते है जो बातें उसके जी में आती है। और हम उससे उसकी गरदन की रग से भी अधिक निकट है","जब दो प्राप्त करनेवाले (फ़रिशते) प्राप्त कर रहे होते है, दाएँ से और बाएँ से वे लगे बैठे होते है","कोई बात उसने कही नहीं कि उसके पास एक निरीक्षक तैयार रहता है","और मौत की बेहोशी ले आई अविश्व नीय चीज़! यही वह चीज़ है जिससे तू कतराता था","और नरसिंघा फूँक दिया गया। यही है वह दिन जिसकी धमकी दी गई थी","हर व्यक्ति इस दशा में आ गया कि उसके साथ एक लानेवाला है और एक गवाही देनेवाला","तू इस चीज़ की ओर से ग़फ़लत में था। अब हमने तुझसे तेरा परदा हटा दिया, तो आज तेरी निगाह बड़ी तेज़ है","उसके साथी ने कहा, \"यह है (तेरी सजा)! मेरे पास कुछ (सहायता के लिए) मौजूद नहीं।","डाल दो, डाल दो, जहन्नम में! हर अकृतज्ञ द्वेष रखने वाले","भलाई से रोकनेवाले, सीमा का अतिक्रमण करनेवाले, सन्देहग्रस्त को","जिसने अल्लाह के साथ किसी दूसरे को पूज्य-प्रभु ठहराया। तो डाल दो उसे कठोर यातना में।","उसका साथी बोला, \"ऐ हमारे रब! मैंने उसे सरकश नहीं बनाया, बल्कि वह स्वयं ही परले दरजे की गुमराही में था।","कहा, \"मेरे सामने मत झगड़ो। मैं तो तुम्हें पहले ही अपनी धमकी से सावधान कर चुका था।","मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं अपने बन्दों पर तनिक भी अत्याचार करता हूँ।","जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे, \"क्या तू भर गई?\" और वह कहेगी, \"क्या अभी और भी कुछ है","और जन्नत डर रखनेवालों के लिए निकट कर दी गई, कुछ भी दूर न रही","यह है वह चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था हर रुजू करनेवाले, बड़ी निगरानी रखनेवाले के लिए","जो रहमान से डरा परोक्ष में और आया रुजू रहनेवाला हृदय लेकर","प्रवेश करो उस (जन्नत) में सलामती के साथ\" वह शाश्वत दिवस है","उनके लिए उसमें वह सब कुछ है जो वे चाहे और हमारे पास उससे अधिक भी है","उनसे पहले हम कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है। वे लोग शक्ति में उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे। (पनाह की तलाश में) उन्होंने नगरों को छान मारा, कोई है भागने को ठिकाना","निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा-सामग्री है जिसके पास दिल हो या वह (दिल से) हाजिर रहकर कान लगाए","हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है छः दिनों में पैदा कर दिया और हमें कोई थकान न छू सकी","अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब की प्रशंसा की तसबीह करो; सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त के पूर्व","और रात की घड़ियों में फिर उसकी तसबीह करो और सजदों के पश्चात भी","और कान लगाकर सुन लेगा जिस दिन पुकारनेवाला अत्यन्त निकट के स्थान से पुकारेगा","जिस दिन लोग भयंकर चीख़ को सत्यतः सुन रहे होंगे। वही दिन होगा निकलने का।","हम ही जीलन प्रदान करते और मृत्यु देते है और हमारी ही ओर अन्ततः आना है।","जिस दिन धरती उनपर से फट जाएगी और वे तेजी से निकल पड़ेंगे। यह इकट्ठा करना हमारे लिए अत्यन्त सरल है","हम जानते है जो कुछ वे कहते है, तुम उनपर कोई ज़बरदस्ती करनेवाले तो हो नहीं। अतः तुम क़ुरआन के द्वारा उसे नसीहत करो जो हमारी चेतावनी से डरे"],"n":"क़ाफ़"},{"i":51,"v":["गवाह है (हवाएँ) जो गर्द-ग़ुबार उड़ाती फिरती है","फिर बोझ उठाती है","फिर नरमी से चलती है","फिर मामले को अलग-अलग करती है","निश्चय ही तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, वह सत्य है","और (कर्मों का) बदला अवश्य सामने आकर रहेगा","गवाह है धारियोंवाला आकाश।","निश्चय ही तुम उस बात में पड़े हुए हो जिनमें कथन भिन्न-भिन्न है","इसमें कोई सरफिरा ही विमुख होता है","मारे जाएँ अटकल दौड़ानेवाले","जो ग़फ़लत में पड़े हुए हैं भूले हुए","पूछते है, \"बदले का दिन कब आएगा","जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे","चखों मज़ा. अपने फ़ितने (उपद्रव) का! यहीं है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।","निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे","जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया, वे उसे ले रहे होंगे। निस्संदेह वे इससे पहले उत्तमकारों में से थे","रातों को थोड़ा ही सोते थे","और वही प्रातः की घड़ियों में क्षमा की प्रार्थना करते थे","और उनके मालों में माँगनेवाले और धनहीन का हक़ था","और धरती में विश्वास करनेवालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है","और ,स्वयं तुम्हारे अपने आप में भी। तो क्या तुम देखते नहीं","और आकाश मे ही तुम्हारी रोज़ी है और वह चीज़ भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है","अतः सौगन्ध है आकाश और धरती के रब की। निश्चय ही वह सत्य बात है ऐसे ही जैसे तुम बोलते हो","क्या इबराईम के प्रतिष्ठित अतिथियों का वृतान्त तुम तक पहँचा","जब वे उसके पास आए तो कहा, \"सलाम है तुमपर!\" उसने भी कहा, \"सलाम है आप लोगों पर भी!\" (और जी में कहा) \"ये तो अपरिचित लोग हैं।","फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया और एक मोटा-ताज़ा बछड़ा (का भूना हुआ मांस) ले आया","और उसे उनके सामने पेश किया। कहा, \"क्या आप खाते नहीं","फिर उसने दिल में उनसे डर महसूस किया। उन्होंने कहा, \"डरिए नहीं।\" और उन्होंने उसे एक ज्ञानवान लड़के की मंगल-सूचना दी","इसपर उसकी स्त्री (चकित होकर) आगे बढ़ी और उसने अपना मुँह पीट लिया और कहने लगी, \"एक बूढ़ी बाँझ (के यहाँ बच्चा पैदा होगा)","उन्होंने कहा, \"ऐसी ही तेरे रब ने कहा है। निश्चय ही वह बड़ा तत्वदर्शी, ज्ञानवान है।","उसने कहा, \"ऐ (अल्लाह के भेजे हुए) दूतों, तुम्हारे सामने क्या मुहिम है","उन्होंने कहा, \"हम एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है","ताकि उनके ऊपर मिट्टी के पत्थर (कंकड़) बरसाएँ","जो आपके रब के यहाँ सीमा का अतिक्रमण करनेवालों के लिए चिन्हित है।","फिर वहाँ जो ईमानवाले थे, उन्हें हमने निकाल लिया","किन्तु हमने वहाँ एक घर के अतिरिक्त मुसलमानों (आज्ञाकारियों) का और कोई घर न पाया","इसके पश्चात हमने वहाँ उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुखद यातना से डरते है","और मूसा के वृतान्त में भी (निशानी है) जब हमने फ़िरऔन के पास के स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा","किन्तु उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और कहा, \"जादूगर है या दीवाना।","अन्ततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया और उन्हें गहरे पानी में फेंक दिया, इस दशा में कि वह निन्दनीय था","और आद में भी (तुम्हारे लिए निशानी है) जबकि हमने उनपर अशुभ वायु चला दी","वह जिस चीज़ पर से गुज़री उसे उसने जीर्ण-शीर्ण करके रख दिया","और समुद्र में भी (तुम्हारे लिए निशानी है) जबकि उनसे कहा गया, \"एक समय तक मज़े कर लो","किन्तु उन्होंने अपने रब के आदेश की अवहेलना की; फिर कड़क ने उन्हें आ लिया और वे देखते रहे","फिर वे न खड़े ही हो सके और न अपना बचाव ही कर सके","और इससे पहले नूह की क़ौम को भी पकड़ा। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे","आकाश को हमने अपने हाथ के बल से बनाया और हम बड़ी समाई रखनेवाले है","और धरती को हमने बिछाया, तो हम क्या ही ख़ूब बिछानेवाले है","और हमने हर चीज़ के जोड़े बनाए, ताकि तुम ध्यान दो","अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। मैं उसकी ओर से तुम्हारे लिए एक प्रत्यक्ष सावधान करनेवाला हूँ","और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य-प्रभु न ठहराओ। मैं उसकी ओर से तुम्हारे लिए एक प्रत्यक्ष सावधान करनेवाला हूँ","इसी तरह उन लोगों के पास भी, जो उनसे पहले गुज़र चुके है, जो भी रसूल आया तो उन्होंने बस यही कहा, \"जादूगर है या दीवाना","क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत कर रखी है? नहीं, बल्कि वे है ही सरकश लोग","अतः उनसे मुँह फेर लो अब तुमपर कोई मलामत नहीं","और याद दिलाते रहो, क्योंकि याद दिलाना ईमानवालों को लाभ पहुँचाता है","मैंने तो जिन्नों और मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी बन्दगी करे","मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ","निश्चय ही अल्लाह ही है रोज़ी देनेवाला, शक्तिशाली, दृढ़","अतः जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए एक नियत पैमाना है; जैसा उनके साथियों का नियत पैमाना था। अतः वे मुझसे जल्दी न मचाएँ","अतः इनकार करनेवालों के लिए बड़ी खराबी है, उनके उस दिन के कारण जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही है"],"n":"ज़ारियात"},{"i":52,"v":["गवाह है तूर पर्वत","और लिखी हुई किताब","फैले हुए झिल्ली के पन्ने में","और बसा हुआ घर","और ऊँची छत","और उफनता समुद्र","कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी","जिसे टालनेवाला कोई नहीं","जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा","और पहाड़ चलते-फिरते होंगे","तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए","जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है","जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे","(कहा जाएगा), \"यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे","अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता","जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।","निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे","जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया","मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।","पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे","जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है","और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे","वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात","और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे","उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे","कहेंगे, \"निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है","अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया","इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।","अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना","या वे कहते है, \"वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है","कह दो, \"प्रतीक्षा करो! मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।","या उनकी बुद्धियाँ यही आदेश दे रही है, या वे ही है सरकश लोग","या वे कहते है, \"उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही कह लिया है?\" नहीं, बल्कि वे ईमान नहीं लाते","अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए","या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए? या वे स्वयं ही अपने स्रष्टाँ है","या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया","या उनके पास तुम्हारे रब के खज़ाने है? या वही उनके परिरक्षक है","या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण","या उस (अल्लाह) के लिए बेटियाँ है और तुम्हारे अपने लिए बेटे","या तुम उनसे कोई पारिश्रामिक माँगते हो कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे है","या उनके पास परोक्ष (स्पष्ट) है जिसके आधार पर वे लिए रहे हो","या वे कोई चाल चलना चाहते है? तो जिन लोगों ने इनकार किया वही चाल की लपेट में आनेवाले है","या अल्लाह के अतिरिक्त उनका कोई और पूज्य-प्रभु है? अल्लाह महान और उच्च है उससे जो वे साझी ठहराते है","यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, \"यह तो परत पर परत बादल है","अतः छोडो उन्हें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन का सामना करें जिसमें उनपर वज्रपात होगा","जिस दिन उनकी चाल उनके कुछ भी काम न आएगी और न उन्हें कोई सहायता ही मिलेगी","और निश्चय ही जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उनके लिए एक यातना है उससे हटकर भी, परन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं","अपने रब का फ़ैसला आने तक धैर्य से काम लो, तुम तो हमारी आँखों में हो, और जब उठो तो अपने रब का गुणगान करो","रात की कुछ घड़ियों में भी उसकी तसबीह करो, और सितारों के पीठ फेरने के समय (प्रातःकाल) भी"],"n":"अत-तूर"},{"i":53,"v":["गवाह है तारा, जब वह नीचे को आए","तुम्हारी साथी (मुहम्मह सल्ल॰) न गुमराह हुआ और न बहका","और न वह अपनी इच्छा से बोलता है","वह तो बस एक प्रकाशना है, जो की जा रही है","उसे बड़ी शक्तियोंवाले ने सिखाया","स्थिर रीतिवाले ने।","अतः वह भरपूर हुआ, इस हाल में कि वह क्षितिज के उच्चतम छोर पर है","फिर वह निकट हुआ और उतर गया","अब दो कमानों के बराबर या उससे भी अधिक निकट हो गया","तब उसने अपने बन्दे की ओर प्रकाशना की, जो कुछ प्रकाशना की।","दिल ने कोई धोखा नहीं दिया, जो कुछ उसने देखा","अब क्या तुम उस चीज़ पर झगड़ते हो, जिसे वह देख रहा है","और निश्चय ही वह उसे एक बार और","सिदरतुल मुन्तहा' (परली सीमा के बेर) के पास उतरते देख चुका है","उसी के निकट 'जन्नतुल मावा' (ठिकानेवाली जन्नत) है।","जबकि छा रहा था उस बेर पर, जो कुछ छा रहा था","निगाह न तो टेढ़ी हुइ और न हद से आगे बढ़ी","निश्चय ही उसने अपने रब की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं","तो क्या तुमने लात और उज़्ज़ा","और तीसरी एक और (देवी) मनात पर विचार किया","क्या तुम्हारे लिए तो बेटे है उनके लिए बेटियाँ","तब तो यह बहुत बेढ़ंगा और अन्यायपूर्ण बँटवारा हुआ","वे तो बस कुछ नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए है। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नहीं उतारी। वे तो केवल अटकल के पीछे चले रहे है और उनके पीछे जो उनके मन की इच्छा होती है। हालाँकि उनके पास उनके रब की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है","(क्या उनकी देवियाँ उन्हें लाभ पहुँचा सकती है) या मनुष्य वह कुछ पा लेगा, जिसकी वह कामना करता है","आख़िरत और दुनिया का मालिक तो अल्लाह ही है","आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते है, उनकी सिफ़ारिश कुछ काम नहीं आएगी; यदि काम आ सकती है तो इसके पश्चात ही कि अल्लाह अनुमति दे, जिसे चाहे और पसन्द करे।","जो लोग आख़िरत को नहीं मानते, वे फ़रिश्तों के देवियों के नाम से अभिहित करते है","हालाँकि इस विषय में उन्हें कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अटकल के पीछे चलते है, हालाँकि सत्य से जो लाभ पहुँचता है वह अटकल से कदापि नहीं पहुँच सकता।","अतः तुम उसको ध्यान में न लाओ जो हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ता है और सांसारिक जीवन के सिवा उसने कुछ नहीं चाहा","ऐसे लोगों के ज्ञान की पहुँच बस यहीं तक है। निश्चय ही तुम्हारा रब ही उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी भली-भाँति जानता है जिसने सीधा मार्ग अपनाया","अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की वह उन्हें उनके किए का बदला दे। और जिन लोगों ने भलाई की उन्हें अच्छा बदला दे","वे लोग जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते है, यह और बात है कि संयोगबश कोई छोटी बुराई उनसे हो जाए। निश्चय ही तुम्हारा रब क्षमाशीलता मे बड़ा व्यापक है। वह तुम्हें उस समय से भली-भाँति जानता है, जबकि उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जबकि तुम अपनी माँओ के पेटों में भ्रुण अवस्था में थे। अतः अपने मन की पवित्रता और निखार का दावा न करो। वह उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है, जिसने डर रखा","क्या तुमने उस व्यक्ति को देखा जिसने मुँह फेरा","और थोड़ा-सा देकर रुक गया","क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है कि वह देख रहा है","या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची, जो मूसा की किताबों में है","और इबराहीम की (किताबों में है), जिसने अल्लाह की बन्दगी का) पूरा-पूरा हक़ अदा कर दिया","यह कि कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ न उठाएगा","और यह कि मनुष्य के लिए बस वही है जिसके लिए उसने प्रयास किया","और यह कि उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।","फिर उसे पूरा बदला दिया जाएगा","और यह कि अन्त में पहुँचना तुम्हारे रब ही की ओर है","और यह कि वही है जो हँसाता और रुलाता है","और यह कि वही जो मारता और जिलाता है","और यह कि वही है जिसने नर और मादा के जोड़े पैदा किए","एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है","और यह कि उसी के ज़िम्मे दोबारा उठाना भी है","और यह कि वही है जिसने धनी और पूँजीपति बनाया","और यह कि वही है जो शेअरा (नामक तारे) का रब है","और यह कि वही है उसी ने प्राचीन आद को विनष्ट किया","और समूद को भी। फिर किसी को बाक़ी न छोड़ा।","और उससे पहले नूह की क़ौम को भी। बेशक वे ज़ालिम और सरकश थे","उलट जानेवाली बस्ती को भी फेंक दिया।","तो ढँक लिया उसे जिस चीज़ ने ढँक लिया","फिर तू अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस के विषय में संदेह करेगा","यह पहले के सावधान-कर्ताओं के सदृश एक सावधान करनेवाला है","निकट आनेवाली (क़ियामत की घड़ी) निकट आ गई","अल्लाह के सिवा कोई नहीं जो उसे प्रकट कर दे","अब क्या तुम इस वाणी पर आश्चर्य करते हो","और हँसते हो और रोते नहीं","जबकि तुम घमंडी और ग़ाफिल हो","अतः अल्लाह को सजदा करो और बन्दगी करो"],"n":"अन-नज्म"},{"i":54,"v":["वह घड़ी निकट और लगी और चाँद फट गया","किन्तु हाल यह है कि यदि वे कोई निशानी देख भी लें तो टाल जाएँगे और कहेंगे, \"यह तो जादू है, पहले से चला आ रहा है","उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया; किन्तु हर मामले के लिए एक नियत अवधि है।","उनके पास अतीत को ऐसी खबरें आ चुकी है, जिनमें ताड़ना अर्थात पूर्णतः तत्वदर्शीता है।","किन्तु चेतावनियाँ उनके कुछ काम नहीं आ रही है","अतः उनसे रुख़ फेर लो - जिस दिन पुकारनेवाला एक अत्यन्त अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा","वे अपनी झुकी हुई निगाहों के साथ अपनी क्रबों से निकल रहे होंगे, मानो वे बिखरी हुई टिड्डियाँ है","दौड़ पड़ने को पुकारनेवाले की ओर। इनकार करनेवाले कहेंगे, \"यह तो एक कठिन दिन है","उनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया। उन्होंने हमारे बन्दे को झूठा ठहराया और कहा, \"यह तो दीवाना है!\" और वह बुरी तरह झिड़का गया","अन्त में उसने अपने रब को पुकारा कि \"मैं दबा हुआ हूँ। अब तू बदला ले।","तब हमने मूसलाधार बरसते हुए पानी से आकाश के द्वार खोल दिए","और धरती को प्रवाहित स्रोतों में परिवर्तित कर दिया, और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था","और हमने उसे एक तख़्तों और कीलोंवाली (नौका) पर सवार किया","जो हमारी निगाहों के सामने चल रही थी - यह बदला था उस व्यक्ति के लिए जिसकी क़द्र नहीं की गई।","हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ दिया; फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत करनेवाला","आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना","निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी","मानो वे उखड़े खजूर के तने हो","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","समूद ने चेतावनियों को झुठलाया","और कहने लगे, \"एक अकेला आदमी, जो हम ही में से है, क्या हम उसके पीछे चलेंगे? तब तो वास्तव में हम गुमराही और दीवानापन में पड़ गए","क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।","कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।","हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे है। अतः तुम उन्हें देखते जाओ और धैर्य से काम लो","और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।","अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए","हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला","लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया","हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।","हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए","उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे","उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, \"लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का","सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची","लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई","उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है","क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है","या वे कहते है, \"और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है","शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे","नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है","निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है","जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, \"चखो मज़ा आग की लपट का","निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है","और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना","और हम तुम्हारे जैसे लोगों को विनष्ट कर चुके है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","जो कुछ उन्होंने किया है, वह पन्नों में अंकित है","और हर छोटी और बड़ी चीज़ लिखित है","निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ो और नहरों के बीच होंगे","प्रतिष्ठित स्थान पर, प्रभुत्वशाली सम्राट के निकट"],"n":"अल-क़मर"},{"i":55,"v":["रहमान ने","क़ुरआन सिखाया","उसी ने मनुष्य को पैदा किया","उसे बोलना सिखाया","सूर्य और चन्द्रमा एक हिसाब के पाबन्द है","और तारे और वृक्ष सजदा करते है","उसने आकाश को ऊँचा किया और संतुलन स्थापित किया","कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो","न्याय के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो।","और धरती को उसने सृष्टल प्राणियों के लिए बनाया","उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है","और भुसवाले अनाज भी और सुगंधित बेल-बूटा भी","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया","और जिन्न को उसने आग की लपट से पैदा किया","फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।","फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उसने दो समुद्रो को प्रवाहित कर दिया, जो आपस में मिल रहे होते है।","उन दोनों के बीच एक परदा बाधक होता है, जिसका वे अतिक्रमण नहीं करते","तो तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन (समुद्रों) से मोती और मूँगा निकलता है।","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओग","प्रत्येक जो भी इस (धरती) पर है, नाशवान है","किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं","आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","ऐ दोनों बोझों! शीघ्र ही हम तुम्हारे लिए निवृत हुए जाते है","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! यदि तुममें हो सके कि आकाशों और धरती की सीमाओं को पार कर सको, तो पार कर जाओ; तुम कदापि पार नहीं कर सकते बिना अधिकार-शक्ति के","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","अतः तुम दोनों पर अग्नि-ज्वाला और धुएँवाला अंगारा (पिघला ताँबा) छोड़ दिया जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला न कर सकोगे।","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","फिर जब आकाश फट जाएगा और लाल चमड़े की तरह लाल हो जाएगा।","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के विषय में पूछा जाएगा न किसी जिन्न से","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","अपराधी अपने चहरों से पहचान लिए जाएँगे और उनके माथे के बालों और टाँगों द्वारा पकड़ लिया जाएगा","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","यही वह जहन्नम है जिसे अपराधी लोग झूठ ठहराते रहे है","वे उनके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहें होंगे","फिर तुम दोनों अपने रब के सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","किन्तु जो अपने रब के सामने खड़े होने का डर रखता होगा, उसके लिए दो बाग़ है।","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","घनी डालियोंवाले","अतः तुम दोनों अपने रब के उपकारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनो (बाग़ो) में दो प्रवाहित स्रोत है।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों (बाग़ो) मे हर स्वादिष्ट फल की दो-दो किस्में हैं","अतः तुम दोनो रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","वे ऐसे बिछौनो पर तकिया लगाए हुए होंगे जिनके अस्तर गाढे रेशम के होंगे, और दोनों बाग़ो के फल झुके हुए निकट ही होंगे।","अतः तुम अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने","फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","मानो वे लाल (याकूत) और प्रवाल (मूँगा) है।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","अच्छाई का बदला अच्छाई के सिवा और क्या हो सकता है","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों से हटकर दो और बाग़ है।","फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","गहरे हरित","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों (बाग़ो) में दो स्रोत है जोश मारते हुए","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उनमें है स्वादिष्ट फल और खजूर और अनार","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उनमें भली और सुन्दर स्त्रियाँ होंगी।","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","हूरें (परम रूपवती स्त्रियाँ) ख़ेमों में रहनेवाली","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","जिन्हें उससे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","वे हरे रेशमी गद्दो और उत्कृष्ट् और असाधारण क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","बड़ा ही बरकतवाला नाम है तुम्हारे प्रतापवान और उदार रब का"],"n":"अर-रहमान"},{"i":56,"v":["जब घटित होनेवाली (घड़ी) घटित हो जाएगी","उसके घटित होने में कुछ भी झुठ नहीं","पस्त करनेवाली होगी, ऊँचा करनेवाली थी","जब धरती थरथराकर काँप उठेगी","और पहाड़ टूटकर चूर्ण-विचुर्ण हो जाएँगे","कि वे बिखरे हुए धूल होकर रह जाएँगे","और तुम लोग तीन प्रकार के हो जाओगे","तो दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली), कैसे होंगे दाहिने हाथ वाले","और बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली), कैसे होंगे बाएँ हाथ वाले","और आगे बढ़ जानेवाले तो आगे बढ़ जानेवाले ही है","वही (अल्लाह के) निकटवर्ती है","नेमत भरी जन्नतों में होंगे","अगलों में से तो बहुत-से होंगे","किन्तु पिछलों में से कम ही","जड़ित तख़्तो पर","तकिया लगाए आमने-सामने होंगे","उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे","प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे","जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा","और स्वादिष्ट॥ फल जो वे पसन्द करें","और पक्षी का मांस जो वे चाह","और बड़ी आँखोंवाली हूरें","मानो छिपाए हुए मोती हो","यह सब उसके बदले में उन्हें प्राप्त होगा जो कुछ वे करते रहे","उसमें वे न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न गुनाह की बात","सिवाय इस बात के कि \"सलाम हो, सलाम हो","रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना","वे वहाँ होंगे जहाँ बिन काँटों के बेर होंगे","और गुच्छेदार केले","दूर तक फैली हुई छाँव","बहता हुआ पानी","बहुत-सा स्वादिष्ट; फल","जिसका सिलसिला टूटनेवाला न होगा और न उसपर कोई रोक-टोक होगी","उच्चकोटि के बिछौने होंगे","(और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया","और हमने उन्हे कुँवारियाँ बनाया","प्रेम दर्शानेवाली और समायु","सौभाग्यशाली लोगों के लिए","वे अगलों में से भी अधिक होगे","और पिछलों में से भी अधिक होंगे","रहे दुर्भाग्यशाली लोग, तो कैसे होंगे दुर्भाग्यशाली लोग","गर्म हवा और खौलते हुए पानी में होंगे","और काले धुएँ की छाँव में","जो न ठंडी होगी और न उत्तम और लाभप्रद","वे इससे पहले सुख-सम्पन्न थे","और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे","कहते थे, \"क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रहे जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में उठाए जाएँगे","और क्या हमारे पहले के बाप-दादा भी","कह दो, \"निश्चय ही अगले और पिछले भी","एक नियत समय पर इकट्ठे कर दिए जाएँगे, जिसका दिन ज्ञात और नियत है","फिर तुम ऐ गुमराहो, झुठलानेवालो","ज़क्कूम के वृक्ष में से खाओंगे","और उसी से पेट भरोगे","और उसके ऊपर से खौलता हुआ पानी पीओगे","और तौस लगे ऊँट की तरह पीओगे।","यह बदला दिए जाने के दिन उनका पहला सत्कार होगा","हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते","तो क्या तुमने विचार किया जो चीज़ तुम टपकाते हो","क्या तुम उसे आकार देते हो, या हम है आकार देनेवाले","हमने तुम्हारे बीच मृत्यु को नियत किया है और हमारे बस से यह बाहर नहीं है","कि हम तुम्हारे जैसों को बदल दें और तुम्हें ऐसी हालत में उठा खड़ा करें जिसे तुम जानते नहीं","तुम तो पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम ध्यान क्यों नहीं देते","फिर क्या तुमने देखा तो कुछ तुम खेती करते हो","क्या उसे तुम उगाते हो या हम उसे उगाते है","यदि हम चाहें तो उसे चूर-चूर कर दें। फिर तुम बातें बनाते रह जाओ","कि \"हमपर उलटा डाँड पड़ गया","बल्कि हम वंचित होकर रह गए","फिर क्या तुमने उस पानी को देखा जिसे तुम पीते हो","क्या उसे बादलों से तुमने पानी बरसाया या बरसानेवाले हम है","यदि हम चाहें तो उसे अत्यन्त खारा बनाकर रख दें। फिर तुम कृतज्ञता क्यों नहीं दिखाते","फिर क्या तुमने उस आग को देखा जिसे तुम सुलगाते हो","क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है या पैदा करनेवाले हम है","हमने उसे एक अनुस्मृति और मरुभुमि के मुसाफ़िरों और ज़रूरतमन्दों के लिए लाभप्रद बनाया","अतः तुम अपने महान रब के नाम की तसबीह करो","अतः नहीं! मैं क़समों खाता हूँ सितारों की स्थितियों की","और यह बहुत बड़ी गवाही है, यदि तुम जानो","निश्चय ही यह प्रतिष्ठित क़ुरआन है","एक सुरक्षित किताब में अंकित है।","उसे केवल पाक-साफ़ व्यक्ति ही हाथ लगाते है","उसका अवतरण सारे संसार के रब की ओर से है।","फिर क्या तुम उस वाणी के प्रति उपेक्षा दर्शाते हो","और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो","फिर ऐसा क्यों नहीं होता, जबकि प्राण कंठ को आ लगते है","और उस समय तुम देख रहे होते हो","और हम तुम्हारी अपेक्षा उससे अधिक निकट होते है। किन्तु तुम देखते नहीं –","फिर ऐसा क्यों नहीं होता कि यदि तुम अधीन नहीं हो","तो उसे (प्राण को) लौटा दो, यदि तुम सच्चे हो","फिर यदि वह (अल्लाह के) निकटवर्तियों में से है","तो (उसके लिए) आराम, सुख-सामग्री और सुगंध है, और नेमतवाला बाग़ है","और यदि वह भाग्यशालियों में से है","तो \"सलाम है तुम्हें कि तुम सौभाग्यशाली में से हो।","किन्तु यदि वह झुठलानेवालों, गुमराहों में से है","तो उसका पहला सत्कार खौलते हुए पानी से होगा","फिर भड़कती हुई आग में उन्हें झोंका जाना है","निस्संदेह यही विश्वसनीय सत्य है","अतः तुम अपने महान रब की तसबीह करो"],"n":"अल-वाक़ि'अह"},{"i":57,"v":["अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है","आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। वही जीवन प्रदान करता है और मृत्यु देता है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है","वही आदि है और अन्त भी और वही व्यक्त है और अव्यक्त भी। और वह हर चीज़ को जानता है","वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया; फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और तुम जहाँ कहीं भी हो, वह तुम्हारे साथ है। और अल्लाह देखता है जो कुछ तुम करते हो","आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है और अल्लाह ही की है ओर सारे मामले पलटते है","वह रात को दिन में प्रविष्ट कराता है और दिन को रात में प्रविष्ट कराता है। वह सीनों में छिपी बात तक को जानता है","ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तु्म्हें अधिकारी बनाया है। तो तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किया, उसने लिए बड़ा प्रतिदान है","तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते; जबकि रसूल तुम्हें निमंत्रण दे रहा है कि तुम अपने रब पर ईमान लाओ और वह तुमसे दृढ़ वचन भी ले चुका है, यदि तुम मोमिन हो","वही है जो अपने बन्दों पर स्पष्ट आयतें उतार रहा है, ताकि वह तुम्हें अंधकारों से प्रकाश की ओर ले आए। और वास्तविकता यह है कि अल्लाह तुमपर अत्यन्त करुणामय, दयावान है","और तुम्हें क्यो हुआ है कि तुम अल्लाह के मार्ग में ख़र्च न करो, हालाँकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है? तुममें से जिन लोगों ने विजय से पूर्व ख़र्च किया और लड़े वे परस्पर एक-दूसरे के समान नहीं है। वे तो दरजे में उनसे बढ़कर है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़े। यद्यपि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा वादा किया है। अल्लाह उसकी ख़बर रखता है, जो कुछ तुम करते हो","कौन है जो अल्लाह को ऋण दे, अच्छा ऋण कि वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे। और उसके लिए सम्मानित प्रतिदान है","जिस दिन तुम मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा है और उनके दाएँ हाथ में है। (कहा जाएगा,) \"आज शुभ सूचना है तुम्हारे लिए ऐसी जन्नतों की जिनके नीचे नहरें बह रही है, जिनमें सदैव रहना है। वही बड़ी सफलता है।","जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, \"तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!\" कहा जाएगा, \"अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!\" इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी","वे उन्हें पुकारकर कहेंगे, \"क्या हम तुम्हारे साथी नहीं थे?\" वे कहेंगे, \"क्यों नहीं? किन्तु तुमने तो अपने आपको फ़ितने (गुमराही) में डाला और प्रतीक्षा करते रहे और सन्देह में पड़े रहे और कामनाओं ने तुम्हें धोखे में डाले रखा है","अब आज न तुमसे कोई फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) लिया जाएगा और न उन लोगों से जिन्होंने इनकार किया। तुम्हारा ठिकाना आग है, और वही तुम्हारी संरक्षिका है। और बहुत ही बुरी जगह है अन्त में पहुँचने की","क्या उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, अभी वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और जो सत्य अवतरित हुआ है उसके आगे झुक जाएँ? और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें किताब दी गई थी, फिर उनपर दीर्ध समय बीत गया। अन्ततः उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी रहे","जान लो, अल्लाह धरती को उसकी मृत्यु के पश्चात जीवन प्रदान करता है। हमने तुम्हारे लिए आयतें खोल-खोलकर बयान कर दी है, ताकि तुम बुद्धि से काम लो","निश्चय ही जो सदका देनेवाले पुरुष और सदका देनेवाली स्त्रियाँ है और उन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण दिया, उसे उसके लिए कई गुना कर दिया जाएगा। और उनके लिए सम्मानित प्रतिदान है","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, वही अपने रब के यहाण सिद्दीक और शहीद है। उनके लिए उनका प्रतिदान और उनका प्रकाश है। किन्तु जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आगवाले हैं","जान लो, सांसारिक जीवन तो बस एक खेल और तमाशा है और एक साज-सज्जा, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना, और धन और सन्तान में परस्पर एक-दूसरे से बढ़ा हुआ प्रदर्शित करना। वर्षा का मिसाल की तरह जिसकी वनस्पति ने किसान का दिल मोह लिया। फिर वह पक जाती है; फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई। फिर वह चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाती है, जबकि आख़िरत में कठोर यातना भी है और अल्लाह की क्षमा और प्रसन्नता भी। सांसारिक जीवन तो केवल धोखे की सुख-सामग्री है","अपने रब की क्षमा और उस जन्नत की ओर अग्रसर होने में एक-दूसरे से बाज़ी ले जाओ, जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए हों। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े उदार अनुग्रह का मालिक है","जो मुसीबतें भी धरती में आती है और तुम्हारे अपने ऊपर, वह अनिवार्यतः एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे अस्तित्व में लाएँ - निश्चय ही यह अल्लाह के लिए आसान है","(यह बात तुम्हें इसलिए बता दी गई) ताकि तुम उस चीज़ का अफ़सोस न करो जो तुम पर जाती रहे और न उसपर फूल जाओ जो उसने तुम्हें प्रदान की हो। अल्लाह किसी इतरानेवाले, बड़ाई जतानेवाले को पसन्द नहीं करता","जो स्वयं कंजूसी करते है और लोगों को भी कंजूसी करने पर उकसाते है, और जो कोई मुँह मोड़े तो अल्लाह तो निस्पृह प्रशंसनीय है","निश्चय ही हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके लिए किताब और तुला उतारी, ताकि लोग इनसाफ़ पर क़ायम हों। और लोहा भी उतारा, जिसमें बड़ी दहशत है और लोगों के लिए कितने ही लाभ है., और (किताब एवं तुला इसलिए भी उतारी) ताकि अल्लाह जान ले कि कौन परोक्ष में रहते हुए उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाह शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है","हमने नूह और इबराहीम को भेजा और उन दोनों की सन्तान में पैग़म्बरी और क़िताब रख दी। फिर उनमें से किसी ने तो संमार्ग अपनाया; किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी थे","फिर उनके पीछ उन्हीं के पद-चिन्हों पर हमने अपने दूसरे रसूलों को भेजा और हमने उनके पीछे मरयम के बेटे ईसा को भेजा और उसे इंजील प्रदान की। और जिन लोगों ने उसका अनुसरण किया, उनके दिलों में हमने करुणा और दया रख दी। रहा संन्यास, तो उसे उन्होंने स्वयं घड़ा था। हमने उसे उनके लिए अनिवार्य नहीं किया था, यदि अनिवार्य किया था तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता की चाहत। फिर वे उसका निर्वाह न कर सकें, जैसा कि उनका निर्वाह करना चाहिए था। अतः उन लोगों को, जो उनमें से वास्तव में ईमान लाए थे, उनका बदला हमने (उन्हें) प्रदान किया। किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी ही है","ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। वह तुम्हें अपनी दयालुता का दोहरा हिस्सा प्रदान करेगा और तुम्हारे लिए एक प्रकाश कर देगा, जिसमें तुम चलोगे और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","ताकि किताबवाले यह न समझें कि अल्लाह के अनुग्रह में से वे किसी चीज़ पर अधिकार न प्राप्त कर सकेंगे और यह कि अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े अनुग्रह का मालिक है"],"n":"अल-हदीद"},{"i":58,"v":["अल्लाह ने उस स्त्री की बात सुन ली जो अपने पति के विषय में तुमसे झगड़ रही है और अल्लाह से शिकायत किए जाती है। अल्लाह तुम दोनों की बातचीत सुन रहा है। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, देखनेवाला है","तुममें से जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं, उनकी माएँ वे नहीं है, उनकी माएँ तो वही है जिन्होंने उनको जन्म दिया है। यह अवश्य है कि वे लोग एक अनुचित बात और झूठ कहते है। और निश्चय ही अल्लाह टाल जानेवाला अत्यन्त क्षमाशील है","जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं; फिर जो बात उन्होंने कही थी उससे रुजू करते है, तो इससे पहले कि दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ एक गर्दन आज़ाद करनी होगी। यह वह बात है जिसकी तुम्हें नसीहत की जाती है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है","किन्तु जिस किसी को ग़ुलाम प्राप्त न हो तो वह निरन्तर दो माह रोज़े रखे, इससे पहले कि वे दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ और जिस किसी को इसकी भी सामर्थ्य न हो तो साठ मुहताजों को भोजन कराना होगा। यह इसलिए कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमानवाले सिद्ध हो सको। ये अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ है। और इनकार करनेवाले के लिए दुखद यातना है","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे अपमानित और तिरस्कृत होकर रहेंगे, जैसे उनसे पहले के लोग अपमानित और तिरस्कृत हो चुके है। हमने स्पष्ट आयतें अवतरित कर दी है और इनकार करनेवालों के लिए अपमानजनक यातना है","जिस दिन अल्लाह उन सबको उठा खड़ा करेगा और जो कुछ उन्होंने किया होगा, उससे उन्हें अवगत करा देगा। अल्लाह ने उसकी गणना कर रखी है, और वे उसे भूले हुए है, और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है","क्या तुमने इसको नहीं देखा कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। कभी ऐसा नहीं होता कि तीन आदमियों की गुप्त वार्ता हो और उनके बीच चौथा वह (अल्लाह) न हो। और न पाँच आदमियों की होती है जिसमें छठा वह न होता हो। और न इससे कम की कोई होती है और न इससे अधिक की भी, किन्तु वह उनके साथ होता है, जहाँ कहीं भी वे हो; फिर जो कुछ भी उन्होंने किया होगा क़ियामत के दिन उससे वह उन्हें अवगत करा देगा। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है","क्या तुमने नहीं देखा जिन्हें कानाफूसी से रोका गया था, फिर वे वही करते रहे जिससे उन्हें रोका गया था। वे आपस में गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की कानाफूसी करते है। और जब तुम्हारे पास आते है तो तुम्हारे प्रति अभिवादन के ऐसे शब्द प्रयोग में लाते है जो शब्द अल्लाह ने तुम्हारे लिए अभिवादन के लिए नहीं कहे। और अपने जी में कहते है, \"जो कुछ हम कहते है उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता?\" उनके लिए जहन्नम ही काफ़ी है जिसमें वे प्रविष्ट होंगे। वह तो बहुत बुरी जगह है, अन्त नें पहुँचने की","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम आपस में गुप्त॥ वार्ता करो तो गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की गुप्त वार्ता न करो, बल्कि नेकी और परहेज़गारी के विषय में आपस में एकान्त वार्ता करो। और अल्लाह का डर रखो, जिसके पास तुम इकट्ठे होगे","वह कानाफूसी तो केवल शैतान की ओर से है, ताकि वह उन्हें ग़म में डाले जो ईमान लाए है। हालाँकि अल्लाह की अवज्ञा के बिना उसे कुछ भी हानि पहुँचाने की सामर्थ्य प्राप्त नहीं। और ईमानवालों को तो अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों में जगह कुशादा कर दे, तो कुशादगी पैदा कर दो। अल्लाह तुम्हारे लिए कुशादगी पैदा करेगा। और जब कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो। तुममें से जो लोग ईमान लाए है और उन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, अल्लाह उनके दरजों को उच्चता प्रदान करेगा। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम रसूल से अकेले में बात करो तो अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़ा दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा और अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम अपने को इसमें असमर्थ पाओ, तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़े दो? जो जब तुमने यह न किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने ऐसे लोगों को मित्र बनाया जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ है? वे न तुममें से है और न उनमें से। और वे जानते-बूझते झूठी बात पर क़सम खाते है","अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है","उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है। अतः वे अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते है। तो उनके लिए रुसवा करनेवाली यातना है","अल्लाह से बचाने के लिए न उनके माल उनके कुछ काम आएँगे और न उनकी सन्तान। वे आगवाले हैं। उसी में वे सदैव रहेंगे","जिस दिन अल्लाह उन सबको उठाएगा तो वे उसके सामने भी इसी तरह क़समें खाएँगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते है और समझते हैं कि वे किसी बुनियाद पर है। सावधान रहो, निश्चय ही वही झूठे है","उनपर शैतान ने पूरी तरह अपना प्रभाव जमा लिया है। अतः उसने अल्लाह की याद को उनसे भुला दिया। वे शैतान की पार्टीवाले हैं। सावधान रहो शैतान की पार्टीवाले ही घाटे में रहनेवाले हैं","निश्चय ही जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते है वे अत्यन्त अपमानित लोगों में से है","अल्लाह ने लिए दिया है, \"मैं और मेरे रसूल ही विजयी होकर रहेंगे।\" निस्संदेह अल्लाह शक्तिमान, प्रभुत्वशाली है","तुम उन लोगों को ऐसा कभी नहीं पाओगे जो अल्लाह और अन्तिम दि पर ईमान रखते है कि वे उन लोगों से प्रेम करते हो जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, यद्यपि